Friday, August 16




जाने क्यूँ


सब कुछ पीछे छोड़
हम चले आये थे 
जाने तुम क्यूँ वापस चले आये 
जाने क्यूँ हमने तुम्हे आने दिया

घाव तो अभी भरे नहीं थे 
सपनों से अभी हम डरे नहीं थे
मौत से आगे बढे नहीं थे
ज़ख्मों में क्यूँ तुम्हे शामिल किया

ख़ामोशी से अभी भी नाता कहाँ हैं 
मन की सड़कों पे खाली यादें जमा हैं
बढ़ते तो सिर्फ कागज़ पे दिन है 
जाने क्यूँ बाकी अब तक यहाँ हैं

मिल कर भी मिल जो जाए तो क्या 
न मिल के जो खोया वो अब भी लापता है 
जाने क्यूँ अब भी तेरे सपनों में शामिल
हैं मेरे सपने जो कभी हमारे न बन पाए

मन्मर्ज़ियाँ जो बयान न कर पाएं
जो छुप जाएँ तो तुम बिन कहाँ जाएँ
जाने क्यूँ ढूंढें बस वोही जो न पाएं 
जाने क्यूँ

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