सब कुछ पीछे छोड़
हम चले आये थे
जाने तुम क्यूँ वापस चले आये
जाने क्यूँ हमने तुम्हे आने दिया
घाव तो अभी भरे नहीं थे
सपनों से अभी हम डरे नहीं थे
मौत से आगे बढे नहीं थे
ज़ख्मों में क्यूँ तुम्हे शामिल किया
ख़ामोशी से अभी भी नाता कहाँ हैं
मन की सड़कों पे खाली यादें जमा हैं
बढ़ते तो सिर्फ कागज़ पे दिन है
जाने क्यूँ बाकी अब तक यहाँ हैं
मिल कर भी मिल जो जाए तो क्या
न मिल के जो खोया वो अब भी लापता है
जाने क्यूँ अब भी तेरे सपनों में शामिल
हैं मेरे सपने जो कभी हमारे न बन पाए
मन्मर्ज़ियाँ जो बयान न कर पाएं
जो छुप जाएँ तो तुम बिन कहाँ जाएँ
जाने क्यूँ ढूंढें बस वोही जो न पाएं
जाने क्यूँ
मन्मर्ज़ियाँ जो बयान न कर पाएं
जो छुप जाएँ तो तुम बिन कहाँ जाएँ
जाने क्यूँ ढूंढें बस वोही जो न पाएं
जाने क्यूँ

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