एक दिन आया
खुद को पाया
खुद से जो मिले
सब कुछ आया
सब कुछ जो मिला
कुछ भी न मिला
जब कुछ न मिला
खुद को पाया
खुद से मिलकर
कुछ ख़ुशी हुई
कुछ ख़ुशी मिली
ग़म भी आया
ग़मगीन रहे ख़ुशी रूठ गयी
हँसना भूले रोना आया
रोते रोते रात गयी
सुबह उठे नया दिन आया
नए दिन का नया सुरूर था
फिर क्यूँ कल में जीने का फितूर था
जब सोचा तो समझ न आया
फिर रात ढली सपना आया
सपने जो थे अपने जो थे
गिन गिन कर उनको अपनाया
कुछ छूटे थे कुछ टूटे थे
आँखों में थे पर रूठे थे
कुछ खो कर भी कितना कुछ पाया
तुम जो आये, सब कुछ आया
मंजिल भी मिली रस्ते भी दिखे
उन रास्तों पर खुद का पाया
दिए चल उस डगर पर, छोड़ पीछे अगर मगर, डर
राहों में हमारी तुम जो थे
खुद को पाया
खुद से जो मिले
सब कुछ आया
सब कुछ जो मिला
कुछ भी न मिला
जब कुछ न मिला
खुद को पाया
खुद से मिलकर
कुछ ख़ुशी हुई
कुछ ख़ुशी मिली
ग़म भी आया
ग़मगीन रहे ख़ुशी रूठ गयी
हँसना भूले रोना आया
रोते रोते रात गयी
सुबह उठे नया दिन आया
नए दिन का नया सुरूर था
फिर क्यूँ कल में जीने का फितूर था
जब सोचा तो समझ न आया
फिर रात ढली सपना आया
सपने जो थे अपने जो थे
गिन गिन कर उनको अपनाया
कुछ छूटे थे कुछ टूटे थे
आँखों में थे पर रूठे थे
कुछ खो कर भी कितना कुछ पाया
तुम जो आये, सब कुछ आया
मंजिल भी मिली रस्ते भी दिखे
उन रास्तों पर खुद का पाया
दिए चल उस डगर पर, छोड़ पीछे अगर मगर, डर
राहों में हमारी तुम जो थे

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