जो चला आया तेरा अक्स
खुले एक दरवाज़े से
तेरा नाम में लिपटा हुआ
एक साया
टूटी मेरी तन्हाई से
मीलों की दूरियां
सादियों के फासले
नापता सिर्फ तेरे क़दमों
की गूंजती आहटों से
तुमने कहा था
सपने तो अपने हैं
अब नीदें ही रवां है तो
बस करवट तुम तक लाती है
बंद आँखे धोखा देती हैं कभी
कभी खुली आँखें पानी बन जाती हैं
दोनों के बीच
एक करवट बन आओ तुम
सपने से खींच
हक़ूीक़त बन आओ अब तुम
तुमने कहा था
सपने तो अपने हैं
अब नीदें ही रवां है तो
बस करवट तुम तक लाती है
बंद आँखे धोखा देती हैं कभी
कभी खुली आँखें पानी बन जाती हैं
दोनों के बीच
एक करवट बन आओ तुम
सपने से खींच
हक़ूीक़त बन आओ अब तुम